Holi Essay In Hindi | Holi Hssay | होली पर निबंध (Essay on Holi in Hindi)- होली पर निबंध हिंदी में

होली पर निबंध (Essay on Holi) –

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Holi Essay In Hindi

संकेत बिंदु:-(1) प्रस्तावना(2) होली मनाने का कारण(3) होली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?(4) त्योहार की अच्छाइयाँ व बुराइयाँ(5) उपसंहार(1) Holi Essay In Hindi

प्रस्तावना :-

हमारा देश त्योहारों का देश है, उन ही त्योहारों में से एक त्योहार है, होली जो अपने ही नाम की तरह अनेक अर्थ में अपना अस्तित्व रखता है। इन नामों की भी एक अलग पहचान है। इसे धुलेंडी व धुरड्डी,धुरखेल या धूलिवन्दन इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। इस त्यौहार को रंगोत्सव भी कहा जाता है यानी रंगों का उत्सव! यह त्योहार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है। फाल्गुन मास की शुरुआत से ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती हैं, तथा मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है।

होली मनाने का कारण | होली क्यों मनाते हैं – होली का इतिहास

होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। ऋतुराज बसंत के आगमन में खेतों में पीले सरसों के फूल दिखाई पड़ते हैं और प्रकृति का रंगीन वातावरण मनभावन लगता है। होली के त्योहार को मनाने के संबंध में दो बातें सामने आती है। पहला यह कि इस समय फसल पक कर तैयार हो जाती है। और हिंदू मान्यता के अनुसार नए अन्न की आहुति अग्नि में दी जाती है जिसे होलिका दहन कहा जाता है।

होलिका दहन को छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। होलिका दहन का एक मुख्य स्थानीय कारण यह भी माना जाता है कि इस समय तैयार फसल के साथ कुछ छोटे जीव व मच्छर भी पैदा हो जाते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं। होलिका दहन में हुए धुंए से यह मच्छर मर जाते हैं। होली मनाने का दूसरा कारण एक ऐतिहासिक कथा से जुड़ा है। प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा हुआ करता था।

जो अपने पुत्र प्रहलाद को ईश्वर की भक्ति करने से मना करता था। हिरण्यकश्यप ने उसे रोकने के कई प्रयास किए तथा अंत में क्रोधित होकर उसने अपनी बहन होलिका से जिससे आग में ना जलने का वरदान प्राप्त था से कहा कि तुम प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ जाओ। होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन प्रहलाद न जलकर होलिका अग्नि में भस्म हो गई। इस प्रकार अच्छाई की बुराई पर जीत हुई। उसी दिन से इस त्यौहार को मनाया जाता है

होली का त्योहार कैसे मनाया जाता है?

फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका दहन किया जाता है जिसमें अन्न की आहुति दी जाती है। यह भी माना जाता है कि सभी बुरी शक्तियां उस आग में जल जाती है। अगले दिन लोग रंगों से खेलते हैं एक- दूसरे को गुलाल लगाते हैं। एक -दूसरे को गले लगाते हैं तथा मिठाईयां बांटते हैं। विविधता में एकता का प्रतीक हमारे देश मैं इस त्यौहार को अनेक प्रकार से मनाया जाता है। जैसे ब्रज की लठमार होली, महाराष्ट्र व गुजरात की मटकी फोड़ होली, पंजाब का ‘होला मोहल्ला’ बंगाल की डोल पुर्णिमा होली आदि।

होली की अच्छाइयाँ व बुराइयाँ

जैसे एक सिक्के के दो पहलू होते हैं वैसे ही इस त्यौहार में कई अच्छाइयाँ व कई बुराइयाँ भी है। वैसे तो त्योहार अच्छाई का प्रतीक होते हैं लेकिन इसे बुरा बनाने में कहीं ना कहीं हम ही जिम्मेदार हैंत्योहार की अच्छाइयाँ- खुशियों और रंगों से भरे इस त्योहार पर लोग आपसी बेर भुलाकर एक दूसरे से गले मिलते हैं लोग एक दूसरे के घर जाकर रंग लगाते हैं तथा मिठाइयां बांटते हैं।

इस प्रकार लोगों के घर-घर जाकर मिलने से प्रेम वह सहयोग की भावना बढ़ती हैत्योहार की बुराइयाँ- होली के पावन अवसर पर कुछ लोग अनैतिक क्रियाएं करते हैं। वे नशे में चूर होकर लड़ाई झगड़े करते हैं तथा नकारात्मकता फैलाते हैं। कुछ लोग गुलाल व रंग की जगह पेंट का उपयोग करते हैं जिससे चर्म संबंधित बीमारियां होती है। यह लोग पशुओं को भी परेशान करते हैं उन पर रंग डालते हैं।

इस प्रकार बेजुबान प्राणियों को परेशान करके हमें कभी खुशी प्राप्त नहीं हो सकती क्योंकि खुशियां बांटने से बढ़ती है किसी को परेशान करने या नकारात्मकता फैलाने से नहीं। होली के दिन लोग बहुत अधिक पानी का दुरुपयोग करते हैं पानी की कमी को देखते हुए हमें पानी का दुरुपयोग रोकना चाहिए। कई लोग इस पर्व पर सार्वजनिक स्थलों को गंदा कर देते हैं ऐसा करने से हमारा परिवेश दूषित होता है।हमें त्योहारों की गरिमा को बनाए रखना चाहिए और प्रेम पूर्वक इन्हें मनाना चाहिए।

उपसंहार

त्योहार कोई भी हो, किसी भी धर्म या समुदाय से जुड़ा हो हमें कुछ ना कुछ शिक्षा जरूर देता है। इस त्योहार से हमें बुराई पर अच्छाई की जीत व अच्छे कर्म करने की शिक्षा मिलती है। लोग त्योहारों पर सभी मनमुटाव को भूलाकर एक दूसरे को गले लगाते हैं। त्योहार आपसी भाईचारा और प्रेम को बढ़ाने के लिए आते हैं शायद यही कारण है कि हमारे देश में हर दिन कोई ना कोई त्यौहार होता है और यही त्योहार हमारे देश की पहचान है।

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