Rajasthan Election 2023 : ये 119 सीटें तय करेगी राजस्थान का नया CM, 60 पर भाजपा तो 21 पर कांग्रेस मजबूत- जानिए कैसे!

Rajasthan Election 2023: राजस्थान में आगामी चुनावों के समय, भाजपा, कांग्रेस, और बसपा जैसी सभी पार्टियां अपनी पूरी मेहनत और शक्ति लगा रही हैं। हालांकि, राजस्थान की सत्ता पर नियंत्रण पाने के लिए वास्तविक संघर्ष बीत रहा है, जिसमें भाजपा और कांग्रेस के बीच 119 सीटों पर महत्वपूर्ण मुकाबला है। प्रदेश में 60 सीटें हैं, जिन पर भाजपा का पक्ष हमेशा मजबूत रहता है, और 21 सीटों पर कांग्रेस का प्रतिष्ठान है। इस प्रकार, 119 सीटों की जीत के लिए दोनों पार्टियां राजनीतिक मैच का सामना कर रही हैं।

हमारे प्रदेश में सत्ता की बदलाव की बहस में 200 सीटों में से 60 सीटें बीजेपी के हाथों में हैं। यह सीटें वो हैं जो हमेशा से बीजेपी के पास रही हैं। साथ ही हमारे प्रदेश में 21 सीटें ऐसी भी हैं जिनपे कांग्रेस की पकड़ है।

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Rajasthan Election 2023

पर हालांकि, सबसे खास बात यह है कि हमारे प्रदेश की 119 सीटें हैं जहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों की नजरें हैं। इन सीटों को जीतने के बाद, सरकार बनाने का मौका मिलता है।

ये 119 सीटें उनमें से हैं जहां वोटर्स हर बार किसे चुनना चाहते हैं, ये उनके क्षेत्र, चेहरे, जाति और कामकाज के आधार पर नर्भर करता हैं। यहां के वोटर्स वादों से ज्यादा अपनी भावनाओं के साथ वोट देते हैं।

भाजपा का इन सीटों पर रहता है कब्जा

अगर हम विधानसभा चुनावों की ओर देखें, तो भाजपा ने पांच बार जीत हासिल की है पाली में। चार बार उदयपुर, लाडपुरा, रामगंज मंडी, सोजत, झालरापाटन, खानपुर, भीलवाड़ा, ब्यावर, फुलेरा, सांगानेर, रेवदर, राजसमंद, और नागौर में भी भाजपा ने जीत हासिल की है।

साथ ही, कोटा साउथ, बूंदी, सूरसागर, भीनमाल, अजमेर नॉर्थ, अजमेर साउथ, मालवीय नगर, रतनगढ़, विद्याधर नगर, बीकानेर ईस्ट, सिवाना, अलवर सिटी, और आसींद में तीन बार भाजपा ने जीत हासिल की।

वहीं, 33 सीटों पर दो बार भाजपा को जीत मिली है।

कांग्रेस को इन सीटों पर मिलती है जीत

जब हम कांग्रेस की ओर देखते हैं, तो पांच बार कांग्रेस को जोधपुर की सरदारपुरा सीट से जीत मिली। बाड़ी सीट पर भी तीन बार कांग्रेस ने जीत हासिल की।

झुंझुनू में तीन बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की, इनमें बागीदौरा, सपोटरा, बाड़मेर, गुढ़ामालानी, और फतेहपुर शामिल हैं। साथ ही, डीग कुमेर, सांचौर, बड़ी सादड़ी, चित्तौड़गढ़, कोटपूतली, सरदारशहर सहित 13 सीटों पर भी कांग्रेस ने जीत हासिल की।

प्रदेश की प्रमुख सीटों के हालात

यदि हम उदयपुर की ओर देखें, तो यहां कांग्रेस को पिछले 25 सालों से एक भी चुनौती नहीं मिली है। इस दौरान, कांग्रेस ने सिर्फ 1985 और 1998 में ही विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की।

फतेहपुर में, भंवरलाल ने 1993 के चुनाव में आखिरी बार जीत हासिल की थी, उसके बाद वहां पर कांग्रेस को कभी भी विजय नहीं मिली।

बस्ती में, कांग्रेस ने 1985 में अंतिम बार जीत हासिल की थी, और फिर 38 साल में कांग्रेस को कभी भी सफलता नहीं मिली। पिछले तीन चुनावों में बस्ती सीट से निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं।

कोटपूतली में, 1998 में रघुवीर सिंह ने जीत हासिल की, लेकिन उसके बाद वहां पर भाजपा को कभी भी विजय नहीं मिली।

सांगानेर सीट पर, 1998 में कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी, लेकिन उसके बाद कांग्रेस यहां कभी नहीं जीत पाई।

रतनगढ़ सीट पर, 1998 में कांग्रेस के जयदेव प्रसाद इंदौरिया जीते थे, लेकिन उसके बाद कांग्रेस को यहां पर विजय नहीं मिली।

सिवान सीट पर, 1998 में कांग्रेस के गोपाराम मेघवाल जीते थे, लेकिन उसके बाद कांग्रेस को यहां पर विजय नहीं मिली। इस तरह से अलवर की रामगढ़ विधानसभा सीट पर जातिगत और धार्मिक आधार पर चुनाव होता है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

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