Red Data Book Kya Hai | रेड डाटा बूक क्या है 2024 : कैसे काम करता है, परिभाषा, उद्देश्य, फायदे और नुकसान पूरी जानकारी

रेड डेटा बुक (Red Data Book) एक सार्वजनिक database है जो किसी दिए गए क्षेत्र में मौजूद जानवरों, पौधों, कवक और स्थानीय उप-प्रजातियों की लुप्त होने वाली और दुर्लभ प्रजातियों का रिकॉर्ड रखता है। रेड डेटा बुक कुछ प्रजातियों पर डाटा प्रदान करती है जो विलुप्त होने के कगार पर या विलुप्त हो चुके हैं।

रेड लिस्ट में प्रजातियों की आठ श्रेणियां शामिल हैं: विलुप्त, दुनिया में विलुप्त, लुप्त होने वाले, गंभीर रूप से संकटग्रस्त,कम जोखिम, कमजोर, मूल्यांकन नहीं किया गया और डेटा की कमी। आज मैं इस पोस्ट मे रेड डाटा बूक क्या है? और यह कैसे काम करता है इसकी पूरी जानकारी दूंगा।

रेड डाटा बुक को पहली बार 1948 में IUCN के द्वारा जारी की गई थी जो एक विश्व स्तरीय संगठन है।

IUCN  का फुल फॉर्म International Union Of Conservation Nature है। आइए अब देखते हैं रेड डाटा बुक किसे कहते हैं या Red Data Book Kya Hai?

रेड डाटा बुक क्या है? Red Data Book Kya Hai

रेड डेटा बुक एक राष्ट्र या राज्य द्वारा अपनी सीमा के भीतर पाए जाने वाले जानवरों और पौधों की हर लूप होने वाली या दुर्लभ प्रजातियों का रिकॉर्ड रखने के लिए एक दस्तावेज है। रेड डेटा बुक (Red Data Book) एक सार्वजनिक database है जो किसी दिए गए क्षेत्र में मौजूद जानवरों, पौधों, कवक और स्थानीय उप-प्रजातियों की लुप्त होने वाली और दुर्लभ प्रजातियों का रिकॉर्ड रखता है।

रेड डेटा बुक कुछ प्रजातियों पर डाटा प्रदान करती है जो विलुप्त होने के कगार पर या विलुप्त हो चुके हैं। दोस्तो पूरी दुनिया मे करोड़ो जीव जन्तु रहते है कोई जीव जन्तु भूमि पर रहता है कोई पानी मे रहता है तो कोई जंगल मे रहता है, इसमे से बहुत सारे ऐसे जीव जन्तु हैं जो पहले दिखाई पड़ते थे लेकिन अब वो दिखाई नहीं देते है।

रेड डाटा बुक को पहली बार 1948 में IUCN (International Union Of Conservation Nature) द्वारा जारी किया गया था जो एक विश्व स्तरीय संगठन है।

IUCN द्वारा इसे समय-समय पर इस अपडेट किया जाता है। इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड में स्थित है। इसकी शुरुआत रूस के वैज्ञानिकों के द्वारा की गई थी जिसे बाद में विश्व स्तरीय संगठन को सौंप दिया गयाथा।

रेड डाटा बुक में पृथ्वी पर मौजूद और विलुप्त हो चुके सभी जीव जंतुओं का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है तथा इस बुक को तीन अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया है।

  • Green Page – इस पेज में पक्षियों या जीव-जंतुओं की ऐसी प्रजातियों का नाम लिखा जाता है, जिन्हें फ़िलहाल किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है और ये पूरी तरह सुरक्षित हैं।
  • Pink Page – इस पेज में पक्षियों या जीव-जंतुओं की ऐसी प्रजातियों का नाम लिखा जाता है, जो कि खतरे में है और जो धीरे-धीरे विलुप्त होते दिखाई दे रहे हैं। दिन-प्रतिदिन ये गायब होते जा रहे हैं।
  • Red Page – इस पेज में पक्षियों या जीव-जंतुओं की ऐसी प्रजातियों का नाम लिखा जाता है, जो कि पूरी तरह से विलुप्त हो चुके हैं या फिर बहुत काम संख्या में बचे हैं।
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Red Data Book Kya Hai

रेड डाटा बुक के बारे में ध्यान देने वाली मुख्य बातें:

  • रेड डेटा बुक में किसी क्षेत्र की दुर्लभ प्रजातियों और उप-प्रजातियों के बारे में विस्तृत जानकारी और एकत्रित जानकारी शामिल है।
  • रेड डेटा बुक को हर तिमाही में विलुप्त होने की समय सीमा के साथ अपडेट किया जाता है।
  • रेड डेटा बुक एक केंद्रित क्षेत्र की प्रत्येक लुप्तप्राय प्रजातियों और उप-प्रजातियों की अद्यतन स्थिति पर वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करती है।
  • रेड डेटा बुक में लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और नवीनीकरण के उपायों के साथ-साथ उक्त प्रजातियों की निगरानी के लिए नियोजित कार्यक्रमों को भी दर्ज किया गया है।
  • इसके लेखकों के माध्यम से, पौधों और कवक की हर एक लुप्तप्राय प्रजातियों और उनकी बाद की उप-प्रजातियों का डेटा रेड डेटा बुक में दर्ज किया गया है। 

IUCN क्या है

IUCN एक प्रकार का संघ हैं जो रेड डाटा बूक को प्रकाशित करती है और दुनिया मे जीतने भी जीव जन्तु हें उनका डाटा रखती हैं उसपर नजर बनाए हुवे रखती है दुनिया मे कितने जीव जन्तु लुप्त हो रहे है इसकी सम्पूर्ण जानकारी IUCN रखती है।

IUCN का पूरा नाम होता है International Union for Conservation of Nature

IUCN की 5 रेड डाटा डाटा बूक

  1. प्रथम बूक-स्तनधारी जीव के लिए
  2. द्वितीय बूक – पंक्षी के लिए
  3. तीसरी बूक – मृस्थलीय उभयचर
  4. चौथी बूक – मछलियाँ के लिए
  5. पाँचवी बूक – पौधे, वनस्पतीया के लिए

Red Data Book में विलुप्त होने वाले जीवों के नाम

पृथ्वी पर सभी जीव जंतुओं का लेखा-जोखा रेड डाटा बुक में मौजूद है तथा विलुप्त हो जाने पर विशेष रूप में इन्हें रेड डाटा बुक में लिखा जाता है। नीचे कुछ जीव-जंतुओं के नाम दिए गए हैं जो कि जो कि रेड डाटा बुक के अनुसार संसार से विलुप्त हो चुके हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं।

  • डायनासॉर
  • डोडो
  • पॉन्डिचेरी शार्क
  • गंगा नदी शार्क
  • कश्मीर हिरन
  • घड़ियाल
  • टॉड की चमड़ी वाला मेंढक
  • सफ़ेद धब्बेदार झड़ी मेंढक
  • पूकोडे लेक बारबो
  • मालाबार सिवेट
  • कोंडना रातो

रेड डेटा बुक: रंग विभाजन

IUCN द्वारा रेड डाटा बुक में निचे दी गई रंग की श्रेणियों को शामिल किया गया है –

रंगप्रजाति खतरे की स्थिति
कालाविलुप्त प्रजाति
लालगंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियां
संतराविलुप्त होने वाली प्रजाति
अंबरकमजोर प्रजातियां
सफ़ेददुर्लभ प्रजाति
हराखतरे की प्रजाति से बाहर
स्लेटीदुर्लभ या लुप्तप्राय प्रजातियां जिनमें वैज्ञानिक जानकारी और विश्लेषण उपलब्ध नहीं है
रेड डेटा बुक: रंग विभाजन

रेड डाटा बूक की रोचक जानकारी

  • दुनिया मे करीब 87 लाख प्रजातिया है और हर दिन किसी न किसी जीव या वनस्पति की खोज हो जाती है। और इन सब के बारे में संपूर्ण जानकारी मौजूद हैं।
  • दुनिया मे गंगा नदी की डोलफ़िन, हूलोक गिब्बन नाम का बंदर, काले गैंडे, घाट वरट मेढक, पूर्वी रूस में पाये जाने वाला अमूर तेंदुआ, आशियाटिक लायन, वैक्विटा नाम की एक बड़ी समुद्री मछली, सुमात्रा में पाए जाने वाले गैंडे, अमूर तेंदुए, जंगली हाथी इत्यादि अभी विलुप्त हो गए है या संकट ग्रस्त या जिनके विलुप्त होने का खतरा है।
  • भारत मे 1952 मे चीता को विलुप्त प्रजाति के रूप मे घोसीत कर दिया गया। लेकिन फ़िलहाल मोदी सर्कार ने 80 चिता बाहर के देशो से मँगाए थे जिससे भारत में इनकी प्रजाति को फिर से आबाद किया जा सके।
  • भारत मे गंभीर रूप से 132 जीव और वनस्पतियों को लुप्त प्राय घोसीत किया गया है जो कि बहुत दुख की बात है।

भारत की रेड डाटा बुक

भारत का न्यायाधिकरण रेड डेटा बुक के अपने संस्करण का रखरखाव करता है। जो की कुछ इस तरह हैं :-

गंभीर रूप से लुप्तप्राय स्तनधारीमालाबार सिवेट (Viverra Civettina)
लुप्तप्राय स्तनधारीढोले / भारतीय जंगली कुत्ता (Cuon Alpinus)
शेर-पूंछ वाला मकाक / वांडरू (Macaca Silenus)
नीलगिरि लंगूर / नीलगिरी पत्ता बंदर (Trachypithecus Johnii)
नीलगिरि तहर (Nilgiritragus Hylocrius)
कमजोर स्तनधारीगौर / भारतीय बाइसन (Indian Bison)
नीलगिरि मार्टन (Martes Gwatkinsii)
गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षीचम्मच बिल सैंडपाइपर (Eurynorhynchus Pygmeus)
खतरनाक सरीसृपों के पाससिसपारा डे गेको (Cnemaspis Sisparensis)
Indian Red Data Book

रेड डाटा बुक के फायदे और नुकसान (red data book kya hai)

रेड डेटा बुक को ऐसी जानकारी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो पृथ्वी के जैविक संसाधनों के संरक्षण में मदद करती है। यह प्रकृति के महत्व और इससे खिलवाड़ करने वाले खतरों की तरफ ध्यान आकर्षित करता है।

रेड डेटा बुक के कुछ फायदे और नुकसान यहां दिए गए हैं:

Red Data Book Kya Hai

रेड डाटा बुक के लाभ

  • रेड डाटा बुक की सहायता से हम विश्व स्तर पर  विभिन्न प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम का अनुमान लगा सकते हैं।
  • Red Data Book का उपयोग चल रहे संरक्षण प्रथाओं के संबंध में सूचना के प्राथमिक स्रोत के रूप में किया जाता है। 
  • रेड डाटा बुक के प्रयोग से किसी भी प्रजाति की जनसंख्या का मूल्यांकन किया जा सकता है।
  • लुप्त होने वाली प्रजातियों के लिए सुरक्षात्मक उपायों को लागू करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।
  • रेड डाटा बुक सभी जानवरों, पक्षियों और अन्य प्रजातियों को उनके संरक्षण की स्थिति के बारे में पहचानने में मदद करता है।

रेड डाटा बुक के नुकसान

  • यह पुस्तक सभी जानवरों, पौधों, अन्य प्रजातियों का पूरा रिकॉर्ड रखती है पर इसमें रोगाणुओं के बारे में कोई जानकारी पढ़ने को नहीं मिलता है।
  • डेटा की वैधता को कई बार सवालों के घेरे में लाया गया है, क्योंकि स्रोतों के दस्तावेज़ीकरण को हमेशा उचित सत्यापन में नहीं लिया जाता है।
  • रेड डेटा बुक हमेशा अपडेट होती रहती है, और इसलिए अज्ञात लुप्तप्राय या विलुप्त प्रजातियों के बारे में डेटा हमेशा सटीक नहीं होता है।
  • इस पुस्तक में लुप्त और विलुप्त दोनों प्रजातियों की कई प्रजातियों का अध्ययन पूरी तरह से नहीं किया गया है।
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निष्कर्ष : Red Data Book Kya Hai

दोस्तो मुझे उम्मीद है की आपको रेड डाटा बूक की सम्पूर्ण जानकारी और रेड डाटा बूक क्या है, कैसे काम करता है इसकी पूरी जानकारी मिल गयी होगी। यह जानकारी पूर्ण रूप से Red Data Book Kya Hai और रेड डाटा बुक किसे कहते हैं इसके ऊपर आधारित था आशा करता हूं आपको हमारी रेड डाटा बुक 2023 की यह जानकारी अच्छी लगी होगी।

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धन्यवाद ।

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Red Data Book FAQ’s

रेड डाटा बुक क्या है ?

रेड डेटा बुक (Red Data Book) एक सार्वजनिक database है जो किसी दिए गए क्षेत्र में मौजूद जानवरों, पौधों, कवक और स्थानीय उप-प्रजातियों की लुप्त होने वाली और दुर्लभ प्रजातियों का रिकॉर्ड रखता है।

Red Data Book को किस संस्था के द्वारा ऑपरेट किया जाता है ?

रेड डाटा बुक को IUCN (International Union Of Conservation Nature) द्वारा चलाया जाता है तथा इसे समय-समय पर अपडेट भी किया जाता है।

Red Data Book की शुरुआत कब की गई थी?

रेड डाटा बुक की शुरुआत IUCN द्वारा 1968 में की गई थी।

रेड डाटा बुक में कितनी प्रजातियों को रखा गया है ?

Red Data Book में लगभग 147500 से अधिक प्रजातियों को रखा गया है।

ग्रीन डाटा बुक क्या है ?

ग्रीन डाटा बुक एक छोटी पॉकेट-आकार की किताब है जिसमें 200 से अधिक अर्थव्यवस्थाओं के पर्यावरणीय डेटा शामिल हैं। यह विश्व विकास संकेतकों पर आधारित है। कृषि, वानिकी, जैव विविधता, प्रदूषण और स्वच्छता प्रमुख संकेतक हैं।

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