Sabhi Dharmo Ke Pita Kon Hai ? सभी धर्मों के भगवान कौन है ?( सभी धर्मो के पिता कोन है )

Sabhi Dharmo Ke Pita Kon Hai : दोस्तों स्वागत है आपका आज के इस लेख में. दोस्तों आपके भी मन में कई बार यह सवाल आया होगा कि Sabhi dharmo Ke Pita kon Hain? या फिर सभी धर्म के भगवान कौन है. दोस्तों आज का हमारा यह लेख इसी टॉपिक पर होने वाला है कि सभी धर्म के पिता कौन है. दोस्तों यह एक बहुत ही गंभीर विषय है क्योंकि सभी धर्म के लोग अपने धर्म के प्रति बहुत ही ज्यादा आस्था रखते हैं और हम नहीं चाहते कि किसी भी धर्म की आस्था का हम किसी भी तरीके से ठेस पहुचाये

 दोस्तों हाल ही में राहतगढ़ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय राहतगढ़ द्वारा दशहरा मैदान में एक फंक्शन आयोजित किया गया था जिसमें रामायण महाभारत श्रीमद् भागवत गीता पर आधारित शब्द दिवसीय ज्ञान यज्ञ शिविर का आयोजन किया गया था

 इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शिवानी से योग शक्ति गीता दीदी थी जिन्होंने अपने प्रवचन में बताया है कि सभी धर्म के पिता कौन है.

उन्होंने बताया कि हमारा दिल दिमाग कहता है कि क्यों ना सभी धर्म के धर्म वह लंबी से या महात्मा साधु संतों मौलवी सूफी से पूछा जाए की सभी धर्म का मालिक कौन है तब वह कहते हैं कि सबका मालिक एक है. पर वह है कौन तो कहते हैं ऊपर वाला है तो हमारे मन में सवाल आता है ऊपर वाला कौन तो वह कहते हैं नाम रूप से न्यारा है

Sabhi Dharmo Ke Pita Kon Hai ?

 अब अगर हम इस्लाम धर्म की बात करें तो उनके अनुसार परमात्मा या खुदा और भगवान को नूर ए इलाही कहते हैं. नूर का मतलब होता है प्रकाश या ज्योति प्रकाश. इस्लाम धर्म की माने तो शरीर धारी को परमात्मा मनाना बहुत बड़ा पाप है.

 क्राइस्ट के अनुसार माने तो परमात्मा को गोद इस लाइट कहते हैं अर्थात् परमात्मा ज्योति यह प्रकाश स्वरूप है

 वही गुरु नानक देव जी ने ओंकार निराकार के तट पर परमात्मा निराकार है.सिख धर्म में परमात्मा को प्रकाश कहते हैं इसलिए सिख धर्म में प्रकाश पर्व मनाते हैं.

 दोस्तों जैसा आप जानते हैं साइन बाबा ने परमात्मा को सबका मालिक एक कहा है अगर हम आदिवासी भाइयों की मां ने तो वें भगवान को बड़ा देव बूढा देव कहते हैं.

 हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथ गीता के अनुसार अगर पूछा जाए कि भगवान कौन है तो गीता के भगवान ने अर्जुन को कहा कि मैं ज्योति स्वरूप को प्रकाश स्वरूप को निराकार हूं

सभी धर्मों के भगवान कौन है ? ( sabhi dharmo ke bhagwan kon he? )

 लगभग सारे ही धर्म में भगवान को निराकार एवं प्रकाश रूपी बताया गया है

 दोस्तों ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार परमात्मा निराकार है जिनका कोई शेयर नहीं है जिन्होंने कभी जन्म नहीं लिया है ना ही वह भोक्ता है वह करता है ज्योति स्वरूप पर प्रकाश स्वरूप है और साथ ही वह जन्म और मरण दोनों से परे है

 Conclusion

 दोस्तों जैसा कि साईं बाबा ने बताया सभी का मालिक एक है तो दोस्तों हमारा मानना यह है कि जैसे सभी धर्म में बताया गया है कि भगवान अल्लाह या जो अभिव्यक्ति किसी को अपने भगवान के रूप में मानता है वह सारे ही निराकार है वह प्रकाश रूपी है

 तो हमारे हिसाब से सभी धर्म के पिता एक ही है जिनका ना कोई आकर है ना उन्होंने कभी जन्म लिया है ना उन्होंने वह कभी मृत्यु को पा सकेंगे. दोस्तों माना जाए तो भगवान अल्लाह ईश्वर सिर्फ एक एनर्जी है जिन्हें हम महसूस कर सकते हैं परंतु कभी देखा नहीं पाएंगे क्योंकि भगवान निराकार है जिन्होंने कभी जन्म नहीं लिया और वह मृत्यु से भी परे हैं  

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